27 लाख आंगनबाड़ी–आशा कार्यकर्ताओं के अधिकारों की निर्णायक लड़ाई
31 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी पत्र व ज्ञापन आंदोलन
देश की सामाजिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली आंगनबाड़ी, आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ता आज भी अपने मूल अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। इन्हीं अधिकारों को दिलाने के उद्देश्य से भारतीय जनता मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शांत प्रकाश जाटव के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक और राष्ट्रव्यापी पहल की गई है।
कोर कमेटी बैठक में बड़ा फैसला
दिनांक 17 दिसंबर 2025 को आयोजित कोर कमेटी की बैठक में यह सर्वसम्मति से तय किया गया कि 31 दिसंबर 2025 को देशभर में राष्ट्रव्यापी पत्र व ज्ञापन आंदोलन चलाया जाएगा। इस आंदोलन में लगभग 27 लाख आंगनबाड़ी–आशा कार्यकर्ता और भारतीय जनता मजदूर संघ के सभी पदाधिकारी पूरी शक्ति के साथ भाग लेंगे।
आंदोलन का स्वरूप
जिला स्तर पर आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ता समूह बनाकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगी।
केंद्र सरकार को भारतीय जनता मजदूर संघ के केंद्रीय कार्यालय से जारी एक समान पत्र-प्रारूप पर हस्ताक्षर कर, नाम–पता–मोबाइल नंबर लिखकर स्पीड पोस्ट/डाक द्वारा पत्र भेजे जाएंगे।
इस तरह देशभर से लाखों पत्र और ज्ञापन सरकार तक पहुँचेंगे।
मूल सवाल: वालंटियर या श्रमिक?
इस आंदोलन का सबसे अहम मुद्दा यह है कि आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता वालंटियर नहीं हैं।
इनसे नियमित, समयबद्ध और लक्ष्य-आधारित कार्य लिया जाता है और बदले में मानदेय (मंडे) दिया जाता है।
माननीय सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार,
> “जो व्यक्ति किसी कार्य के बदले पारिश्रमिक प्राप्त करता है, वह श्रमिक की श्रेणी में आता है।”
इसके बावजूद आज तक इन कार्यकर्ताओं को श्रमिक का दर्जा, न्यूनतम मजदूरी, ईएसआई, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिली है। भारतीय जनता मजदूर संघ की स्पष्ट मांग है कि किसी नए न्यायालयीन निर्णय की प्रतीक्षा किए बिना, पहले से स्थापित सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों के आधार पर ही इन्हें तत्काल श्रमिक का दर्जा दिया जाए।
शांत प्रकाश जाटव का आह्वान
राष्ट्रीय अध्यक्ष शांत प्रकाश जाटव ने देशभर की आंगनबाड़ी–आशा बहनों से आह्वान करते हुए कहा कि—
यह लड़ाई केवल मानदेय की नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और श्रमिक पहचान की है।
27 लाख कार्यकर्ताओं की एकजुट आवाज़ नया इतिहास रचेगी और सरकार को न्यायोचित निर्णय लेने के लिए बाध्य करेगी।
निष्कर्ष
31 दिसंबर 2025 का दिन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला श्रमिक अधिकारों के संघर्ष में मील का पत्थर बनने जा रहा है। यदि यह आंदोलन अपनी पूरी शक्ति के साथ सफल होता है, तो यह देश की सबसे बड़ी महिला श्रमिक एकजुटता का उदाहरण बनेगा।
– लेखक/प्रस्तुतकर्ता:
शांत प्रकाश जाटव
राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता मजदूर संघ
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